Wednesday, 2 February 2011

जिसे भुलाना चाहू............




जिसे
भुलाना चाहू
उतनीही दुगनी याद आती है ।
अपनों की दरो दीवारों को
अपने आगोश में भरलू
अपनी खिडकीसे आकाश देखूंगी
जिसमे तेरा नाम हो वोह तारा धुन्दुंगी
तारोंकि की उस बारात में में भी खूब झुमुंगी ।।